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ऐसे मुर्शिद और राहबर का क्या फायदा जो अपने मुरीदों और चाहने वालों की मुसीबतों में रूहानी मदद ही न करे...। (IT IS USELESS TO FOLLOW A SPIRITUAL MASTER/GUIDE WHO DOESN'T HELP DISCIPLES IN NEED...!)

"इंसान को अपने वादे का पक्का होना चाहिए।

जो मुर्शिद और राहबर अपने मुरीदों और चाहने वालों की मुसीबतों में रूहानी मदद नहीं करता उसकी खासकर दो ही वज़ह होती हैं: (1) वह आपका इम्तिहान ले रहा है। (2) वह आपको टरका रहा है। वह दरअसल आपकी मदद करना ही नहीं चाहता। वह तो बस आपको अपने दिल, ख्यालात और सहूलियत के मुताबिक़ इस्तेमाल कर रहा है।
अगर वह आपका इम्तिहान ले रहा है तो अच्छी बात है। मगर अगर वह बेवकूफ बना रहा है तो उससे अपना पीछा छुड़ा लीजिए। किसी भी मुर्शिद और राहबर  को  परखने के लिए  एक साल का वक्त ही बहुत होता है। आखिर ऐसे मुर्शिद और राहबर के पीछे पीछे चलने का क्या फायदा जो अपने मुरीदों और चाहने वालों की मुसीबतों में रूहानी मदद ही न करे...।"
- डाॅ स्वामी अप्रतिमानंदा जी

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Tags: Dr, aprtemaanandaa, guides, jee, masters, need, spiritual, spirituality, swaamee, yoga

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